Thursday, June 14, 2018

वीरभद्र अवतार - सती प्रजापति दक्ष की पुत्री थी जब सती बढ़ी हुई तो वे शिव के प्यार में लीन हो गयी। जब प्रजापति दक्ष को सती के प्रेम की बात का पता चला तो दक्ष ने इस प्रेम का कड़ा विरोध किया।
वीरभद्र अवतार 
क्योकि दक्ष शिव को अपना दुश्मन मानता था। फिर भी सती और शिव का विवाह हो जाता हैएक दिन दक्ष ने एक महान यज्ञ के लिए व्यवस्था की, और दक्ष ने सभी देवताओं को आमंत्रित किया केवल शिव सती को छोड़कर। सती अपने माता-पिता के प्रति स्नेह के कारण अपने घर जाने का आग्रह करती है किन्तु शिव जाने से मना कर देते है लेकिन माता सती   फिर भी अपने पिता के यज्ञ में चली जाती है, जब सती वहा पहुंची तो दक्ष ने उसे और शिव को बहुत अपमानित किया दूसरों के सामने, किन्तु सती ये सहन नही कर पायी और दक्ष द्वारा आयोजित यज्ञ में माता सती ने अपनी देह का त्याग कर दिया । जब भगवान शिव को यह ज्ञात हुआ तो उन्होंने क्रोध में अपने सिर से एक जटा उखाड़ी और उसे रोषपूर्वक पर्वत के ऊपर पटक दिया। उस जटा के पूर्वभाग से महाभंयकर वीरभद्र प्रगट हुए। शिव के इस अवतार ने दक्ष के यज्ञ का विध्वंस कर दिया और दक्ष का सिर काटकर उसे मृत्युदंड दिया।

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Mahakal
मेरे जीवन में शिव जी का एक एहम स्थान है। मैं अपना सारा जीवन उनकी भगती में कुर्बान कर देना चाहता हूँ। उन्हों ने मेरे हर अच्छे बुरे बक्त में मेरा साथ दिया है। मेरे शिव भोले तो मेरी जान से भी प्यारे है। मै जब भी उनका जाप करता हूँ तो मुझे ऐसा लगता है की वो मेरे साथ ही है। मेरा जीवन उनके बिना अधूरा है। मेरे शिव कालों के काल महाकाल है। उनकी लिला अपरम पार है।
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